बिहार नंबर 1 न्यूज़ चैनल

पुर्णिया – राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के 113 वीं जयन्ती के अवसर पर आभासी माध्यम से वेविनार का आयोजन किया गया

पूर्णिया विश्वविद्यालय के दिनकर अध्ययन पीठ के तत्त्वावधान में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के 113 वीं जयन्ती के अवसर पर आभासी माध्यम से वेविनार का आयोजन किया गया।

समारोह का आरम्भ पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.राजनाथ यादव के द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वित्त परामर्शी, वित्त पदाधिकारी, अध्यक्ष, छात्र कल्याण, कुलानुशासक एवं सहायक कुलसचिव (प्रशासन) दिनकर अध्ययन पीठ के प्रभारी के अतिरिक्त स्नातकोत्तर विभागों विभागाध्यक्ष उपस्थित थे।

अपने उद्घाटन उद्बोधन में कुलपति ने स्व. दिनकर की बहुआयामी व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्हें जनकवि के रूप में स्मरण किया। उनकी कई कविताओं का सस्वर पाठ उन्होंने किया।

पूर्णिया में उनके प्रवास के दौरान रश्मिरथी जैसी कालजयी रचना का उल्लेख करते हुए कई रोचक संस्मरण का स्मरण किया। उन्होंने छात्रों शोधार्थियों को उनकी जीवनी पढ़ने एवं उनकी राष्ट्रप्रेम की भावना से प्रेरणा ग्रहण करने का आह्वान किया।

अतिथि वक्ता डा.सुरेन्द्र नारायण यादव ने कहा कि दिनकर को भारतीय संस्कृति की गहरी समझ थी। उन्होंने कहा कि साहित्यकारों, कवियों एवं  महापुरूषों की जयन्ती के बहाने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व से अनुप्राणित होना होगा। राष्ट्रकवि के रूप में दिनकर ने भारतीय समाज को प्रभावित किया।

मुख्य अतिथि तिलका मांझी भागलपूर विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग की प्रो. प्रतिभा राजहंस ने अपने पूर्व कुलपति स्व.दिनकर को श्रद्धांजलि देते हुए दिनकर के बहुआयामी व्यक्तित्व की चर्चा की।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता पूर्व के कवि होने के वावजूद वे स्वतंत्रता पश्चात् भी मौन नहीं रहे। स्वतंत्रता पश्चात् भी उनकी लेखनी प्रखर एवं मुखर रही। यह प्रखरता एक दलित चिंतक के रूप में भी रही।

सामाजिक विषमताओं पर प्रहार करना उनकी स्वभावगत आदत थी। देश में व्याप्त विषमताओं पर अपनी लेखनी के माध्यम से कई बार प्रहार किया। उन्होंने कहा कि उनके साहित्य के कई आयाम हैं। इन सब पर अभी भी अद्ययन एवं शोध होना शेष है।

कार्यक्रम की परिकल्पना, संयोजन, स्वागत भाषण एवं संचालन दिनकर अध्ययन पीठ के प्रभारी प्रो. गौरी कान्त झा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग के डा. पुरन्दर दास ने किया।

समारोह मे साहित्य अकादमी, दिल्ली के सौजन्य से निर्मित राष्ट्रकवि दिनकर के जीवन पर तैयार फीचर की प्रस्तुति एवं आकाशवाणी के सौजन्य से दिनकर की आवाज में कविता की प्रस्तुति सराहनीय रही।

आभासी माध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम में अनेक महाविद्यालय के प्रधानाचार्य, स्नातकोत्तर विभागों के अध्यक्ष, शोधार्थी एवं छात्रगण उपस्थित थे।

संवाददाता – शिवाजी राव

CATEGORIES
Share This

COMMENTS

Wordpress (0)
Disqus (0 )
error: Content is protected !!